Scientists ने खोजा एक नया महाद्वीप “ज़ीळैंडीया”।

हाल ही के दिनों में साइंटिस्ट ने ढूंढा एक महाद्वीप जो पिछले 375 सालों से था तो, मगर कभी हमारी उस पर नजर नहीं गई। इस महाद्वीप का नाम है,ज़ीलैंडिया। यह आईलैंड, जो सुपरकॉन्टिनेंट गोंडवाना से अलग हो गया है। इसे तस्मांतिस नाम से भी जाना जाता है। यह आइलैंड मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण पूर्व के ओशियन में स्थित है। यह लगभग 94% जलमग्न केवल 6% समुद्र तल के ऊपर है। इस आइलैंड पर सबसे ऊंचा स्थान 3724 मीटर पर एओराकी माउंट कुक है।
यह महाद्वीप जो पहले गोंडवाना का हिस्सा हुआ करता था। लगभग 83 मिलियन वर्ष पहले गोंडवाना से टूटने के बाद इसका निर्माण हुआ। उसके बाद लगभग 100 मिलियन वर्ष पहले एंटार्टिका से अलग हुआ। और फिर 80 मिलियन वर्ष पहले ऑस्ट्रेलिया से अलग हुआ। और अब यह अपने आप में एक अलग ही तरह का महाद्वीप है जो बाकी सबसे अलग समुद्र तल में आधा छुपा और आधा बहार नजर आता है।

ज़ीलैंडिया आकार में लगभग ऑस्ट्रेलिया से आधा है, लेकिन उसका 7% हिस्सा ही केवल समुद्र तल के ऊपर नजर आता है। अधिकतर यह समुद्र के अंदर डूबा रहता है। न्यू कैलेडोनिया के कुछ आइलैंड्स मिलकर उत्तर की तरफ एक चोचिला सा महाद्वीप बनाते है, उस महाद्वीप का नाम ज़ीलैंडिया है। इसकी जलवायु न्यूनतम है,और वहाँ पर तापमान भी अधिकतर सामान्य होता है। वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो ये काफी ऐक्टिव महाद्वीप है। इस महाद्वीप के दक्षिण से लेकर उत्तर तक एक ज्वालामुखी की पहाड़ी श्रृंखला है, जो इसके बीच से होकर गुजरती हैं। या उत्तर द्वीप के ठीक बीच दक्षिण में होकर कई टापुओं से मिलकर बना एक छोटा सा महाद्वीप है।

यूँ तो वैग्यानिकों ने ज़ीलैंडिया के होने की भविष्यवाणी कई सालों पहले कर दी थी। परंतु फिर भी इसका अस्तित्व खोजने में 375 साल से भी अधिक का समय लगा। क्योंकि इतने सालों तक यह आइलैंड कहीं छुपा रहा। और फिर 1 दिन अचानक ही खोजते खोजते ये महाद्वीप सामने प्रस्तुत हो गया। तो कह सकते हैं कि ज़ीलैंडिया की खोज आकस्मिक ही थी। भूवैज्ञानिक और भूकंप वैज्ञानिक की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने मिलकर ज़ीलैंडिया का एक नया ही मानचित्र बनाया है।
यदि पानी के नीचे डूबे हुए ज़ीलैंडिया की बात करें। तो यह कई खनीज पदार्थों और मिनरल्स से भरपूर है। यहाँ पर नेचुरल गैस भी पाई जाती है जो लगभग पूरे महाद्वीप में फैली हुई है। यदि वैज्ञानिकता की दृष्टि से या व्यापार के दृष्टि से देखा जाए तो यह महाद्वीप एक बहुत ही व्यापक क्षेत्र है। कई प्रकार के महत्वपूर्ण मिनरल्स यहाँ पाए जाते हैं। ग्लेशियर पीरियड के पिघलने के दौरान इसका अधिकतर क्षेत्र पानी के अंदर डूबा रहता है। परन्तु जब वह ग्लेशियर पिघलना बंद हो जाते हैं और समुद्र का जल स्तर नीचे होता है। तब एक बहुत बड़ा हिस्सा महाद्वीप का पानी के ऊपर आ जाता है। और तब इसका क्षेत्रफल थोड़ा बढ़ जाता है। ज़ीलैंडिया पर बहुत सारे ऐसे खनीज पदार्थ भी पाए जाते हैं। जिनकी किमत बहुत अधिक है या फिर यूं कहें वे बहुत ही मूल्यवान है।

जिला इंडिया की खोज अपने आप में एक बहुत ही रोमांचक खोज है। तथा हमें वे अपने वैग्यानिकों और उनके इस साहस पूर्ण कार्य के लिए उन्हें बधाई देनी चाहिए। तथा उनके इस कार्य की सराहना भी करनी चाहिए। उनके नाकाम प्रयास की बदौलत ही,आज हम इतनी महत्वपूर्ण खोज इसके बारे में जान पाए हैं। उन्होंने न केवल पृथ्वी के एक हिस्से को सामने लाकर जागरूक किया है, बल्कि समुद्र तल के नीचे बह रही बहुत ही महत्वपूर्ण व मूल्यवान धरोहर को भी सामने लाया है। एक बात तो मानने वाली है, की ज्ञान की यह यात्रा तथा ज़ीलैंडीया की खोज अपने आप में एक बहुत बड़ा उदाहरण है। कि आगे और भी बहुत कुछ जो हमें चौंकाने के साथ हैरान भी कर देगा। तथा हमें हमारे ही पृथ्वी के बारे में बहुत कुछ नया जानने को मिलेगा।
The Review
terimeribat
हाल ही के दिनों में साइंटिस्ट ने ढूंढा एक महाद्वीप जो पिछले 375 सालों से था तो, मगर कभी हमारी उस पर नजर नहीं गई। इस महाद्वीप का नाम है,ज़ीलैंडिया। यह आईलैंड, जो सुपरकॉन्टिनेंट गोंडवाना से अलग हो गया है। इसे तस्मांतिस नाम से भी जाना जाता है। यह आइलैंड मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण पूर्व के ओशियन में स्थित है।




















